2,200 करोड़ के भुगतान पर सियासी घमासान की आहट: अब विधानसभा घेरेंगे हजारों ठेकेदार
17 जुलाई को नवा रायपुर कूच का ऐलान, बोले— दो साल से सिर्फ आश्वासन; भुगतान नहीं मिला तो होगा आर-पार का आंदोलन..
रायपुर। प्रदेश के सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों का सरकार और विभागों के खिलाफ आक्रोश अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। करोड़ों रुपये के लंबित भुगतान, अनुबंध के बाद नई-नई शर्तें लागू करने, विभागीय मनमानी और अफसरशाही से नाराज छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने 17 जुलाई को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। मानसून सत्र के दौरान होने वाले इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से हजारों ठेकेदारों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
एसोसिएशन के अनुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अंतर्गत संचालित जल जीवन मिशन – हर घर जल योजना में कार्य कर चुके ठेकेदारों का लगभग 2,200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित है। कई ठेकेदारों ने कार्य पूर्ण कर विभाग को सौंप दिया है, जबकि अनेक परियोजनाओं में रनिंग बिल भी महीनों से अटके हुए हैं। भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदारों पर बैंक ऋण, मशीनरी की किश्तें, मजदूरों का भुगतान, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं की देनदारियां और अन्य वित्तीय दायित्वों का भारी दबाव बढ़ गया है।
एसोसिएशन का कहना है कि भुगतान नहीं मिलने से अनेक ठेकेदार आर्थिक संकट के कगार पर पहुंच चुके हैं। कई निर्माण कार्यों की गति भी प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।
नीर भवन घेराव के बाद भी नहीं निकला समाधान
ठेकेदारों ने इससे पहले राजधानी रायपुर स्थित नीर भवन का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों के नाम ज्ञापन भी सौंपे गए। एसोसिएशन का दावा है कि पिछले दो वर्षों में कई दौर की बैठकों, ज्ञापनों और पत्राचार के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। अब तक केवल आश्वासन मिले, लेकिन भुगतान और नीतिगत निर्णयों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
'अनुबंध के बाद बदले जा रहे नियम'
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि विभागों द्वारा अनुबंध होने के बाद लगातार नई-नई शर्तें और नियम लागू किए जा रहे हैं, जिससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है। उनका कहना है कि जिन कार्यों का अनुबंध पहले की शर्तों पर हुआ, उनमें बाद में नए प्रावधान लागू कर भुगतान रोका जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने कहा कि ठेकेदार लगातार शासन और प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखते रहे हैं। मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय प्रमुखों से कई बार मुलाकात की गई, लेकिन समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई। इससे प्रदेशभर के ठेकेदारों में भारी नाराजगी है।
17 जुलाई को विधानसभा घेराव
एसोसिएशन ने घोषणा की है कि 17 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों से ठेकेदार रायपुर पहुंचेंगे। सुबह 11 बजे छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले नवा रायपुर स्थित विधानसभा की ओर कूच किया जाएगा। मानसून सत्र के दौरान होने वाले इस प्रदर्शन के माध्यम से ठेकेदार अपनी एकजुटता दिखाते हुए सरकार का ध्यान लंबित भुगतान और अन्य मांगों की ओर आकर्षित करेंगे।
मुख्य मांगें
- जल जीवन मिशन सहित सभी विभागों के लंबित एवं रनिंग बिलों का तत्काल भुगतान।
- अनुबंध के बाद लागू किए गए नए नियमों और शर्तों को वापस लिया जाए।
- विभागीय मनमानी और भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी पर रोक लगाई जाए।
- भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाया जाए।
- निर्माण कार्यों के हस्तांतरण और तकनीकी स्वीकृति की लंबित प्रक्रियाओं का शीघ्र निराकरण किया जाए।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि विधानसभा घेराव के बाद भी सरकार ने ठेकेदारों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। ठेकेदारों का कहना है कि यह केवल भुगतान का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और प्रदेश के विकास कार्यों से जुड़ा विषय है, इसलिए अब वे निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।



Beauro Cheif



