माननीय मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध “सिद्ध कदाचार” की जाँच हेतु संसदीय समिति गठन की मांग

माननीय मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध “सिद्ध कदाचार” की जाँच हेतु संसदीय समिति गठन की मांग

नई दिल्ली।देश के शिक्षाविद्, सामाजिक चिंतक एवं RTI कार्यकर्ता डॉ. नवीन प्रकाश नौटियाल द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4) एवं 124(5) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध कथित “कॉकरोच संबंधी टिप्पणी” को लेकर संसदीय जाँच समिति गठित किए जाने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में लोकसभा एवं राज्यसभा के माननीय सांसदों को संबोधित एक संवैधानिक निवेदन प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. नवीन प्रकाश नौटियाल ने अपने निवेदन में कहा है कि उक्त कथित टिप्पणी से देश के अनेक युवा स्वयं को मानसिक रूप से आहत एवं अपमानित महसूस कर रहे हैं। युवाओं के एक बड़े वर्ग का मानना है कि इस प्रकार की टिप्पणी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा, संवेदनशीलता एवं लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि भारतीय संविधान संसद को यह अधिकार देता है कि “सिद्ध कदाचार” (Proven Misbehavior) की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विरुद्ध निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत जाँच एवं महाभियोग की कार्यवाही प्रारम्भ की जा सके।

इसी आधार पर सांसदों से मांग की गई है कि—

1. पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच हेतु संसदीय जाँच समिति गठित की जाए।

2. यह परीक्षण किया जाए कि संबंधित कथित टिप्पणी संविधान में वर्णित “सिद्ध कदाचार” की परिधि में आती है अथवा नहीं।

3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखते हुए संवैधानिक उत्तरदायित्व, पारदर्शिता एवं जनविश्वास को सुदृढ़ किया जाए।

निवेदन में स्पष्ट किया गया है कि यह मांग न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक institutions एवं संवैधानिक पदों के प्रति नागरिकों, विशेषकर युवाओं, के विश्वास को मजबूत करने की भावना से की गई है।

साथ ही सांसदों से अपेक्षा व्यक्त की गई है कि वे इस विषय पर संवैधानिक मर्यादा, राष्ट्रीय हित एवं लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को ध्यान में रखते हुए गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे।