अनुमान से उलट यदि बीजेपी जीती है तो लोगों की जन आकांक्षा डॉक्टर रमन सिंह को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की रही है।

अनुमान से उलट यदि बीजेपी जीती है तो लोगों की जन आकांक्षा डॉक्टर रमन सिंह को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की रही है।

नई दिल्ली डेस्क। हाल ही में हुए देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में यदि विभिन्न माध्यमों की अवधारणा थी तो छत्तीसगढ़ ही एक मात्र राज्य ऐसा था,जहां कांग्रेस की वापसी की बात हो रही थी।यहां तक कि बीजेपी भी छत्तीसगढ़ के चुनाव को मुश्किल मान कर चल रही थी।खास कर भूपेश बघेल ने ये माहौल बनाया था कि वो जीत रहे हैं और बड़ी ताक़त के साथ जीत रहे हैं और तो और उन्होंने 75 पार का नारा देकर सबको चौका दिया।जिसे कांग्रेस के केंद्रीय नेता भी दोहराने से नहीं चूके सिवाय टीएस बाबा के। हालांकि ज़मीन पर लहर उनके ख़िलाफ़ थी, जिसे कोई पकड़ नहीं पाया और कोई इसे महसूस भी किया तो बोलने की साहस नहीं थी।ऐसे में भाजपा के 15 साल की सरकार में मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर रमन सिंह ही एक मात्र नेता थे जो बार-बार इस बात को दोहराते रहे कि छत्तीसगढ़ में इस बार भारी बहुमत के साथ बीजेपी सरकार बनाने जा रही है।इससे साफ जाहिर है कि प्रदेश के जनता की जन आकांक्षा बेदाग छबि के नेता डॉ रमन सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की रही है।

देश में हुए पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद अब मुख्यमंत्री को लेकर कवायद तेज हो गई है, इस बीच एक मात्र राज्य तेलंगाना में जीत हासिल करी कांग्रेस पार्टी ने नए मुख्यमंत्री की घोषणा कर दी है। जबकि भाजपा अभी तक तीन राज्यों में अपने मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान नहीं किया है। सबसे ज्यादा हलचल इस समय राजस्थान में मुख्यमंत्री चयन को लेकर देखी जा रही है जबकि छत्तीसगढ़ में कोई खास हलचल अभी तक नहीं है, वहीं बताया जा रहा है कि जिस तरह के नाम मीडिया के माध्यम से उछाले जा रहे हैं वह पूर्ण रूप से प्रायोजित है जबकि इन नामों पर किसी तरह का कोई विचार दिल्ली में हो ही नहीं रही है और तय माना जा रहा है कि भाजपा फिर से एक बार 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर रमन सिंह को ही फिर से मौका देने जा रही है। इसके पीछे की वजह भी साफ है कि वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जो विपक्ष से समझौता वादी में नहीं करता और इसके साथ ही उनकी छवि बेदाग रहा है।कांग्रेस अपने 5 साल के कार्यकाल में उनके ऊपर एक कार्यवाही भी न कर सकी।

छत्तीसगढ़ में नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार के मुद्दे में कार्रवाई को लेकर रहेगी इसलिए की विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग सभी सभाओं में भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटकाने और जेल भेजने की गारंटी की बात कह कर छत्तीसगढ़ की जनता का विश्वास जीतने का प्रयास किया है और इस दिशा में यदि त्वरित कार्रवाई नहीं होती है तो पांच माह बाद होने वाले देश के आम चुनाव लोकसभा पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।जिससे बीजेपी को बड़ा नुकसान हो सकता है और कांग्रेस खुद इसे मुद्दा बनाने से नहीं चुकेगी।भ्रष्टाचार की श्रेणी में सबसे बड़ा मुद्दा जो PSC का छाया रहा।बड़ी चुनौती है और दूसरा निवर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कार्यवाही।जिसमें महादेव एप्प को लेकर कथित 508 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप खुद प्रधानमंत्री ने ईडी के हवाले से सार्वजनिक मंच से कही है और कहीं इस पर कार्यवाही नहीं होती है तो प्रदेश की जनता ये मान लेगी की यह सिर्फ चुनावी जुमला था।ऐसे में इसकी पूरी जिम्मेदारी भावी मुख्यमंत्री पर होगी और डॉक्टर रमन सिंह के अलावा और कोई नहीं जो इस तरह के मामले में साहसिक कदम उठाने की क्षमता रखता हो।

छत्तीसगढ़ में फिलहाल किसी भी मुख्यमंत्री के दावेदारों के नाम के बंगले में ना ही कोई शक्ति प्रदर्शन हो रहा है और ना ही ऐसी कोई बात जिसमें विधायकों को लॉबिंग करने की दिख रही है।ऐसा भी नहीं क विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश हो रही हो, यह बात जरूर है की वरिष्ठ नेता के साथ-साथ लगातार 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह से लगभग सभी विधायकों ने उनके निवास में बारी-बारी से जाकर मुलाकात की है और तय माना जा रहा है कि देर सवेर जब नए मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान होगा तो वह नाम डॉक्टर रमन सिंह का होगा।उसके पहले डॉ रमन सिंह एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं कल ही उन्होंने ट्वीट कर आला प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे बैक डेट पर किस तरह की फाइल में साइन कर ऐसा कोई काम न करें जो व्यवहारिक न हो।