मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति में दबदबा रखने वाले शुक्ल परिवार के वर्चस्व को फिर से कायम करने की तैयारी।संघर्ष मोर्चा का कल बड़ा सम्मेलन।अमितेश शुक्ल की अगुवाई में होगा संघर्ष।
रायपुर(छत्तीसगढ़)। रविशंकर शुक्ल के परिवार या कहें शुक्ल परिवार का वर्चस्व जो कई दशकों तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति के साथ-साथ देश की राजनीति में भी ऐसा रहा कि देश के अन्य राज्यों में जब यहां के लोग जाया करते थे, तो स्थान की जगह लोगों की पहचान वीसी शुक्ल जहां के हैं वहां से हुआ करती थी। वह वर्चस्व समय के साथ कम होता गया, जिसे एक युग का अंत ही कहा जा सकता है। विद्याचरण शुक्ल की 2013 में मृत्यु और अमितेष शुक्ल की सक्रियता में कमी ने परिवार के राजनीतिक प्रभाव को समय के साथ और कम कर दिया। यहां तक कि इस बीच कई नेता दिल्ली में शुक्ल परिवार के जिक्र पर यह कहते भी नहीं चूके की अब शुक्ल परिवार में कोई नहीं रहा। परंतु अब फिर से एक बार पृथक छत्तीसगढ़ राज्य गठन की मांग को लेकर अगुआ रहे वीसी शुक्ल की संघर्ष मोर्चा को सक्रिय कर प्रदेश भर के वीसी समर्थक लामबंद हो रहे हैं। कल इसका बड़ा सम्मेलन रखा गया है।जहां यह प्रस्ताव पास किया जा सकता है कि अमितेश शुक्ल के नेतृत्व में मोर्चा को पूरे छत्तीसगढ़ में सक्रिय करने विस्तार की जरूरत है।
अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रहे पं. रविशंकर शुक्ल। उनके जेष्ठ पुत्र श्यामाचरण शुक्ल जो मध्यप्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में कई दशकों तक ताकतवर मंत्री रहे विद्याचरण शुक्ल के निधन के बाद, परिवार में वैसी पकड़ का अभाव दिखा।छत्तीसगढ़ राज्य के पृथक गठन के बाद यही माना जा रहा था कि पं. रविशंकर शुक्ल की तरह वीसी शुक्ल को छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलेगा। परंतु राजनीति में सब कुछ वैसा नहीं होता जैसा सोचा जाए और उन्हें यह मौका नहीं मिला। यहीं से छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्ल परिवार की दिशा बदलने लगी और शुक्ल समर्थक कई बड़े व पुराने लोग उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिए। बावजूद इन परिस्थितियों में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अमितेष शुक्ल को अपने मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बना कर पंचायत जैसे बड़े विभाग दिए। विद्याचरण शुक्ल ने 2003-04 में भाजपा में जाने और फिर कांग्रेस में वापसी के बाद एक तरह से राजनीतिक निर्वासन का सामना किया, और 2013 में उनकी मृत्यु के साथ ही उनके युग का अंत हो गया।
15 वर्षों तक विपक्ष में रहने के बाद छत्तीसगढ़ में साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी भरकम बहुमत मिली,जिसमें राजिम से अमितेष शुक्ल भी जीते।जिसके जीत का अंतर पहले के चुनावों से कहीं ज्यादा था। वहीं प्रदेश में कुल जीत वाले कांग्रेस विधायकों की संख्या भी अप्रत्याशित। ऐसे में अमितेष शुक्ल को कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला। कहा तो यह भी जाता है कि सोनिया गांधी खुद एक नहीं दो-दो बार खुद होकर अमितेष शुक्ल को मंत्री बनाये जाने की पहल की बावजूद उन्हें यह मौका नहीं मिला और फिर से एकबार शुक्ल समर्थकों के हिस्से निराशा ही हाथ लगी।यह निराशा ऐसा की साल 2023 के चुनाव में हार के रूप में तब्दील हो गई। शुक्ल परिवार का समग्र राजनीतिक वर्चस्व, जो कभी मध्य प्रदेश के राजनीतिक क्षितिज पर था,अब लगभग समाप्त हो गया।परंतु शुक्ल परिवार का इस तरह का राजनीतिक पतन उनके समर्थकों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं।
संघर्ष मोर्चा के मजबूत सदस्य रहे वीसी शुक्ल के कट्टर समर्थकों में से एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता बीरेश शुक्ला ने कहा,जिस संघर्ष मोर्चा के बैनर पर वीसी शुक्ल की अगुवाई में छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई।जिस मोर्चा में लाखों लोग जुड़ कर अभूतपूर्व एकता का परिचय दिया। उन्हें अब लग रहा है कि छत्तीसगढ़ का गठन जिस उद्देश्य को लेकर हुआ था।वह पूरा नहीं हो रहा है।जल जंगल जमीन बिक रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों का हक छीना जा रहा है। छत्तीसगढ़ की धन संपदा पर बाहर के लोगों का कब्जा होते जा रहा है। इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थापना के 25 वर्ष बाद रजत उन्हें फिर से एक बार जोड़ने का समय आ गया है। हम सब की इच्छा है शुक्ल परिवार के वरिष्ठ व पूर्व मंत्री अमितेष शुक्ल अब इस मोर्चा की अगुवाई करें। 25 वर्ष बाद फिर से एक बार छत्तीसगढ़ को इस संघर्ष मोर्चा की जरूरत है। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ के रजत जयंती के इस अवसर पर भारी संख्या में लोग कल सम्मेलन में सम्मिलित होंगे।



Beauro Cheif



