कुलसचिवों पर कार्रवाई, कुलपति पर खामोशी! उच्च शिक्षा विभाग के दोहरे मापदंड पर उठे सवाल!
अनियमितताओं पर कुलसचिवों पर गाज, लेकिन कुलपति पर क्यों नहीं? रायगढ़ विवि पर उठे सवाल। प्रो.पटेरिया क्या सरकार पर भारी पड़ रहे हैं?
रायपुर। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर इन दिनों एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के कई प्रभारी कुलसचिवों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जिन विश्वविद्यालयों में ये निर्णय हुए, वहां के कुलपतियों की भूमिका पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इसी के साथ अब शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, जहां जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि अन्य विश्वविद्यालयों में समान आरोपों पर कार्रवाई हो रही है, तो रायगढ़ विश्वविद्यालय के मामलों की जांच अब तक क्यों नहीं की गई।
प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालय इन दिनों नियमित कुलसचिवों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। 15 विश्वविद्यालयों वाले राज्य में वर्तमान में केवल दो ही नियमित कुलसचिव पदस्थ हैं।उसमें भी एक की पदस्थापना उच्च शिक्षा संचनालाय में है।जबकि अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रभारी व्यवस्था के तहत प्रशासनिक कार्य संचालित हो रहे हैं।
इसी बीच पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के प्रभारी कुलसचिवों के खिलाफ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की गई लगातार कार्रवाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि अनियमितताएं हुई हैं तो उनकी जवाबदेही केवल कुलसचिवों तक सीमित क्यों दिखाई दे रही है।
सबसे पहले मामला छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU), भिलाई का सामने आया, जहां परिवारवाद, भ्रष्टाचार और अयोग्य महाविद्यालयों को मान्यता देने के आरोपों के बाद तकनीकी शिक्षा विभाग ने प्रभारी कुलसचिव डॉ. अंकित अरोरा को पद से हटा दिया और उन्हें उनकी मूल पदस्थापना शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, अंबिकापुर भेज दिया। सूत्रों के अनुसार उस समय विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
इसके बाद पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर में कुलसचिव डॉ. भुवन सिंह राज को आठ पदों पर भर्ती में अनियमितता तथा विधानसभा में भ्रामक जानकारी देने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। भर्ती जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में प्रशासनिक स्वीकृति और निगरानी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
वहीं राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रभारी कुलसचिव सौमित्र तिवारी का तबादला कर उन्हें बिलासपुर स्थित अन्य विश्वविद्यालय भेज दिया गया। इस घटनाक्रम ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर समन्वय और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए।
ताजा मामला अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर का है, जहां कुलसचिव शैलेन्द्र दुबे को विश्वविद्यालय मद की राशि में कथित गड़बड़ी, जेम पोर्टल के माध्यम से सामग्री क्रय में आर्थिक अनियमितता तथा छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 (संशोधित 2025) के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया गया है। निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
इन सभी घटनाओं के बाद शिक्षा जगत में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि विश्वविद्यालयों में होने वाले प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों की अंतिम जिम्मेदारी आखिर किसकी होती है। विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार कुलपति ही संस्थान के मुख्य कार्यपालक और प्रशासनिक प्रमुख होते हैं। ऐसे में यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो उनकी जवाबदेही केवल कुलसचिवों तक सीमित रहना कई प्रश्न खड़े करता है।

इधर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का दावा है कि यहां जेम पोर्टल के माध्यम से ऐसे उपकरणों और सामग्रियों की खरीदी की गई है, जिनकी वास्तविक आवश्यकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह भी चर्चा है कि पूरी खरीद उन्हीं फर्मों से की गई हैं, जिनके खिलाफ अन्य विश्वविद्यालयों में कार्रवाई की जा चुकी है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अन्य विश्वविद्यालयों में समान प्रकृति के आरोपों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है, तो रायगढ़ विश्वविद्यालय के मामलों की जांच अब तक क्यों नहीं हुई। क्या यह केवल संयोग है या फिर किसी प्रकार की प्रशासनिक नरमी? सवाल यह भी किया जा रहा है कि कार्यकाल समाप्ति के बाद भी कुलपति प्रो.पटेरिया पूरी भाजपा सरकार पर भारी पड़ रहे हैं।



Beauro Cheif



