श्रीमती यशोवन्ति सतपथी ने पेंशन के पैसे से अपने पति चैतन सतपथी जिस स्कूल में ताउम्र शिक्षक रहे स्कूल का स्वागत द्वार बनवा कर उदाहरण प्रस्तुत किया

श्रीमती यशोवन्ति सतपथी ने पेंशन के पैसे से अपने पति चैतन सतपथी जिस स्कूल में ताउम्र शिक्षक रहे स्कूल का स्वागत द्वार बनवा कर उदाहरण प्रस्तुत किया

 

बसना/अंकोरी। चैतन सतपथी ग्राम अंकोरी के जिस शासकीय मिडिल स्कूल में ताउम्र प्रधान अध्यापक रहे मरणोपरांत उनकी धर्मपत्नी श्रीमती यशोवन्ति सतपथी ने उन्हें मिल रहे पेंशन के पैसे से उसी स्कूल के लिए लाखों रुपये की लागत से निर्मित प्रवेश द्वार बनवा कर समाज के लिए एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर अपने पति को अमर कर दिया। आज 15 अगस्त के दिन इस प्रवेश द्वार का विधिवत फीता काट कर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित स्कूल के बच्चों व ग्रमीणों की उपस्थिति में श्रीमती यशोवन्ति सतपथी ने  उद्धघाटन कर स्कूल को इसे सौंप दिया।

बसना से 12 किलोमीटर की दूरी में स्थित एक गांव अंकोरी में चैतन सतपथी जब 1970 के दशक में स्थानांतरित हो कर एक कनिष्ठ शिक्षक के रूप में पदस्त हुए तो इस पूरे इलाके में एक मात्र स्कूल हुआ करता था। स्कूल का भवन भी अनुमान से कहीं छोटा हुआ करता था। चैतन सतपथी इस स्कूल में अपनी शिक्षकीय पारी शुरू किए तो ताउम्र इसी स्कूल में ही रहे और मिडिल स्कूल में प्रधान पाठक के रूप में सेवानिवृत्त हुए। सतपथी गुरुजी के नाम से विख्यात उनके आचरण और ईमानदारी को लेकर क्षेत्र के लोग आज भी उन्हें स्मरण करते हैं। समय के पाबंद,अनुशासन प्रिय सतपथी गुरुजी स्कूल पहुँचने कभी एक मिनट की भी देरी नहीं किया करते थे। स्कूल के सरकारी हिसाब किताब को लेकर वे एकदम ईमानदार थे। एक-एक रुपये का उनके आवक जावक में उल्लेख होता था। सेवानिवृत्त के बाद अचानक से एक दिन उन्हें निमोनिया की शिकायत मिली और रायपुर के एक निजी अस्पताल में 72 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

स्वर्गीय चैतन सतपथी की धर्मपत्नी श्रीमती यशोवन्ति सतपथी ने सोचा उनके पति जिस स्कूल के सेवा में पूरा समय गुजार दिए तो क्यों न उनकी स्मृति में उसी स्कूल के लिए एक स्वागत द्वार बना दिया जाए और उनको मिल रहे पेंशन के पैसे को एकत्र कर लाखों रुपए लागत लगा कर एक स्वागत द्वार बनवा दिया। जिसका आज 15 अगस्त को विधिवत उन्हीं के हाथों फीता काट कर उद्धघाटन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्कूल के बच्चे,शिक्षक व पंचायत के सरपंच रवि डडसेना,पूर्व सरपंच वेणुधर साहू एवं सभी पंच सहित काफी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।चैतन सतपथी अमर रहे नारों के साथ सभी को मिठाई बांट कर 15 अगस्त की शुभकामनाएं दी गई। चैतन सतपथी के भाई प्रशन्न सतपथी, पुत्र ब्रजेश सतपथी,हितेश सतपथी भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित थे। श्रीमती यशोवन्ति सतपथी ने इस पुनीत कार्य के माध्यम से समाज मे एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है।जिसकी पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है।निजी स्कूलों के लिए तो लोग खर्च कर लेते हैं पर किसी शासकीय स्कूल के लिए इस तरह का उदाहरण कम मिलता है जो श्रीमती सतपथी ने कर दिखाया है।