निर्माण सामग्री 25% महंगी, ठेकेदारों का बगावती तेवर काम बंद करने की चेतावनी, सरकार को घेरा—‘रेट नहीं बढ़े तो ठप होंगे प्रोजेक्ट’

निर्माण सामग्री 25% महंगी, ठेकेदारों का बगावती तेवर काम बंद करने की चेतावनी, सरकार को घेरा—‘रेट नहीं बढ़े तो ठप होंगे प्रोजेक्ट’

रायपुर। निर्माण सामग्री की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी से सरकारी निर्माण कार्यों पर संकट गहरा गया है। छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों ने साफ संकेत दे दिया है कि दरों में संशोधन (रेट रिवीजन) नहीं हुआ तो काम बंद करना पड़ेगा।

राजधानी रायपुर में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी की अहम बैठक हुई, जिसमें प्रदेशभर से पदाधिकारी शामिल हुए। करीब तीन से चार घंटे चली बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, विभागीय सचिवों और प्रमुख अभियंताओं को जल्द ज्ञापन सौंपा जाएगा।

बैठक में ठेकेदारों ने सड़क, पुल और भवन निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री—जैसे डामर, लोहा और एल्युमिनियम—की कीमतों में तेज बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि जिन कार्यों के टेंडर स्वीकृत होकर वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, उन्हें वर्तमान दरों पर पूरा करना संभव नहीं है।

ठेकेदारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध के प्रभाव के चलते निर्माण सामग्री के दाम अचानक बढ़ गए हैं, जो टेंडर दरों से 20-25 फीसदी अधिक हैं। ऐसे में काम जारी रखना घाटे का सौदा बन गया है और कई ठेकेदार कर्ज में डूबने की कगार पर हैं।

पीक सीजन में बढ़ी मुश्किलें

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने बताया कि गर्मी का मौसम सड़क निर्माण और डामरीकरण का पीक सीजन होता है, लेकिन इसी समय डामर की कीमत 50 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर 84 हजार रुपये तक पहुंच गई है। गैस की किल्लत के कारण टाइल्स कटिंग जैसे काम भी प्रभावित हो रहे हैं।

डामरीकरण और पुल निर्माण सबसे ज्यादा प्रभावित

प्रदेशभर में सड़कों के मरम्मत और डामरीकरण के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर जारी हुए हैं, लेकिन सामग्री की कमी और बढ़ी कीमतों के कारण ये कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, लोहा महंगा होने से ओवरब्रिज और अंडरब्रिज निर्माण भी प्रभावित है।

ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द रेट रिवाइज नहीं किया गया तो मजबूरन निर्माण कार्य ठप करने का निर्णय लेना पड़ेगा।