मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ‘धृतराष्ट्र’ बनाने की साजिश तो नहीं? — प्रमोद दुबे का गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ‘धृतराष्ट्र’ बनाने की साजिश तो नहीं? — प्रमोद दुबे का गंभीर आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लेकर एक विवादित और गंभीर टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने पोस्ट में दुबे ने सरकार के खिलाफ लगातार सामने आ रहे कथित घोटालों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि कहीं मुख्यमंत्री को “धृतराष्ट्र” बनाकर बदनाम करने की साजिश तो नहीं रची जा रही है।

कांग्रेस पार्टी में प्रमोद दुबे वो नेता हैं,जो सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच विष्णुदेव सरकार की नाकामियों को आये दिन बड़े ही स्पष्ट व प्रमाणित रूप से उजागर करते रहते हैं।प्रमोद दुबे द्वारा उठाये गए मुद्दे बेहद ही संवेदनशील व पढ़े लिखे लोगों के बीच व्यापक प्रभावकारी होते हैं।बता दें कि प्रमोद दुबे कांग्रेस पार्टी में एकलौते नेता हैं, जो छात्र राजनीति के शिखर तक पहुंचने की सफर तय की थी। रायपुर नगर निगम के वे एक मात्र मेयर हुए हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में नगर की जनता के अनुरूप वो कर दिखाया,जिसकी चर्चा व मिशाल आज भी दी जाती है।एक अच्छे विचारक,सकारात्मक सोच,एक विजन के साथ लक्ष्य तक पहुंचने की कला व न जाने और कितनी ही राजनीतिक गुण के धनी हैं और जब इस कद का नेता जब कुछ बोलता है,तो चर्चा तो होती है।उन्होंने आज ऐसे ही अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में गंभीर बात की है,जिसका विस्तार जरूरी है। 

उन्होंने अपने पोस्ट में हाल के दिनों में प्रकाशित विभिन्न खबरों का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि “कल साड़ी घोटाला 12 करोड़ का छपा था, आज तिरपाल खरीदी में 18 करोड़ के घोटाले की खबर है, परसों किताब छपाई में भ्रष्टाचार, उससे पहले 40 हजार की रोटी मशीन को 3 से 6 लाख में खरीदी का मामला सामने आया। जम्हूरी योजना में 15 करोड़, शराब होलोग्राम में करोड़ों का हिसाब गायब और राइस मिल में 20 करोड़ का धान ‘चूहों द्वारा खा जाने’ जैसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं। भाजपा सरकार में हर दिन एक नया घोटाला उजागर हो रहा है।”

उन्होंने आगे आशंका जताते हुए लिखा कि “ऐसा तो नहीं कि एक आदिवासी मुख्यमंत्री बनाकर उनके कंधे पर बंदूक रखकर रोज ऐसी खबरें चलाकर उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही हो। आदिवासी होने की आड़ में विक्टिम कार्ड खेला जा रहा है। इतने कम समय में किसी सरकार की इतनी बदनामी शायद ही देखने को मिली हो।”

दुबे ने सरकार के भीतर संभावित सत्ता संघर्ष की ओर भी इशारा किया। उन्होंने लिखा, “दोनों उपमुख्यमंत्री के अलावा 2 वरिष्ठ मंत्री भी मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। आखिर कुछ मंत्री विष्णु देव जी को बदनाम कर पर्दे के पीछे से उन्हें पदमुक्त करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? मुख्यमंत्री को ‘धृतराष्ट्र’ बनाने की साजिश करने वालों को सीएम हाउस क्यों नहीं पहचान पा रहा है?”

दुबे के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोपों ने भाजपा सरकार के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को भी हवा दी है, खासकर तब जब हाल ही में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सामने हैं।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आगामी ढाई वर्षों में विकास कार्यों को नई गति देने के साथ-साथ संगठन और सरकार में कुछ बदलावों पर भी विचार कर रहा है। ऐसे में नई टीम और नए चेहरों को अवसर देने की संभावनाएं भी जताई जा रही है। हो सकता है,पूरा मंत्रिमंडल ही बदल जाये की भी संभावना जताई जा रही है।पिछले दिनों मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा व बस्तर के नए विजन कि चर्चा को भी इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है।

वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की छवि एक सरल, सौम्य और आदिवासी समाज के प्रतिनिधि नेता के रूप में देखी जाती है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर उनकी पकड़ और निर्णय प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। आरोप यह भी हैं कि कई अहम निर्णयों में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका स्पष्ट नहीं दिखती, जबकि विवादों की जिम्मेदारी उन पर ही आ रही है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वाकई सत्ता के भीतर किसी बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है।